श्री राधा जी के 28 नाम कोन-कोन से है (Radha ji ke 28 Naam)

श्री राधा जी की भक्ति भारतीय संस्कृति और वैष्णव परंपरा में सर्वोपरि स्थान रखती है। पूज्य Premanand Maharaj Ji, जिनका जीवन पूर्णतः राधा-कृष्ण भक्ति और सेवा में समर्पित है, हमेशा यही सिखाते हैं कि श्री राधा जी की उपासना से ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त होता है। उनका कहना है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ या अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की शुद्धि और जीवन की मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है।

श्री राधा जी के 28 नाम का नियमित जाप करना अत्यंत पुण्यकारी है। पूज्य Maharaj Ji सिखाते हैं कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति भाव से इन नामों का पाठ करता है, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता, और उसे जीवन्मुक्ति का वरदान प्राप्त होता है। पूज्य महाराजी जो की किशोरी जी की उपासना करते है उन्होंने बताए है जो राधा जी के 28 नामो का जो रोजाना पाठ करता है , वह जीवन्मुक्त हो जाता है, ऐसा ब्रह्मा जी ने कहा है। 

|| राधा, रासेश्वरी, रम्या, कृष्णमत्राधिदेवता, सर्वाद्या, सर्ववन्द्या, वृन्दावनविहारिणी, वृन्दाराध्या, रमा, अशेषगोपीमण्डलपूजिता, सत्या, सत्यपरा, सत्यभामा, श्रीकृष्णवल्लभा, वृषभानुसुता, गोपी, मूल प्रकृति, ईश्वरी, गान्धर्वा, राधिका, आरम्या, रुक्मिणी, परमेश्वरी, परात्परतरा, पूर्णा, पूर्णचन्द्रविमानना, भुक्ति- मुक्तिप्रदा, भवव्याधि-विनाशिनी ||

Premanand Maharaj Ji ने बार-बार यह बताया कि इन नामों का जाप मन, वचन और कर्म से किया जाए। केवल उच्चारण मात्र नहीं, बल्कि हृदय से श्रद्धा और भक्ति के साथ नामों का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति का मन पवित्र होता है, जीवन की सारी बाधाएँ दूर होती हैं, और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

श्री राधा जी की भक्ति में अनेक कीर्तन और जयकारे शामिल हैं, जो हृदय को उल्लासित करते हैं और भक्त को भगवान के निकट ले जाते हैं। Premanand Maharaj Ji ने इन कीर्तनों को सुनने और गाने को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उनकी शिक्षाओं के अनुसार, जयकारे और भजन केवल गीत नहीं हैं, बल्कि ये भक्ति के माध्यम से चेतना को भगवान की ओर मोड़ने का साधन हैं।

कीर्तन एवं जयकारा

भक्ति मार्ग में कीर्तन और जयकारे भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। Maharaj Ji सिखाते हैं कि जयकारे और भजन केवल गीत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और चेतना का संचार हैं। ये भक्ति के माध्यम से भक्त को भगवान के निकट ले जाते हैं।

जै-जै राधावल्लभ श्री हरिवंश ।

जै-जै श्रीवृन्दावन श्रीवनचंद ॥

जै-जै राधावल्लभ श्री हरिवंश ।

जै-जै श्रीवृन्दावन श्रीवनचंद ॥

जै-जै राधावल्लभ गुरु हरिवंश ।

जै-जै गुरु वृन्दावन गुरु वनचंद ॥

जै-जै राधावल्लभ हित हरिवंश ।

जै-जै हित वृन्दावन हित वनचंद ॥

जै-जै राधावल्लभ प्यारौ हरिवंश ।

जै जै प्यारौ वृन्दावन प्यारौ वनचंद ॥

जै-जै राधावल्लभ प्राण हरिवंश ।

जै जै प्राण वृन्दावन प्राण वनचंद ॥

जै जै राधावल्लभ जीवन हरिवंश ।

जै जै जीवन वृन्दावन जीवन वनचंद ॥

जै जै राधावल्लभ सर्वस्व हरिवंश ।

जै जै सर्वस्व वृन्दावन सर्वस्व वनचंद ॥

जै जै राधावल्लभ हित हरिवंश । 

जै जै हित सेवक रसिकनि अवतंश ॥

रँगीलौ राधावल्लभ हित हरिवंश …………

छबीलौ राधावल्लभ प्यारौ हरिवंश…..

रसीली राधावल्लभ जीवन हरिवंश….

जै जै हरिवंश जै जै हरिवंश ।

श्री हरिवंश जै जै जै हरिवंश ॥

जै जै श्यामा जै जै श्याम । जै जै श्रीवृन्दावन धाम ॥

पावन राधे तेरौ नाम । पावन श्रीवृन्दावन धाम 

मेरी श्यामा मेरौ श्याम । मेरौ श्रीवृन्दावन धाम ॥ 

प्यारी श्यामा प्यारौ श्याम । प्यारौ श्रीवृन्दावन धाम ॥ 

यह जोरी अविचल अभिराम । हृदय विराजौ आठौं याम ॥

जयकारा

जै-जै श्रीनवनिभृतनिकुञ्ज विलासी 

श्रीहित राधावल्लभलाल की जय ! 

ठा० श्री राधामोहन जू महाराज की जय !

ठा० श्री राधापिय जू महाराज की जय ! 

महाप्रभु श्रीहित हरिवंशचन्द्रजू महाराज कि जय ! 

श्रीहित सेवकजू महाराज की जय ! 

समस्त सहचरीवृन्द की जय ! 

श्रीवृन्दावन धाम की जय ! श्रीयमुना रसरानी की जय ! 

समस्त सन्त हरि भक्तन की जय ! 

श्रीसद्गुरुदेव भगवान् की जय ! 

जै जै श्रीराधे.. श्याम ! 

जै जै श्रीराधे.. श्याम ! 

जै जै श्रीराधे.. श्याम ! 

जै जै श्रीहित हरिवंश ! 

Premanand Maharaj Ji सिखाते हैं कि ये जयकारे भक्त के हृदय में प्रेम और श्रद्धा का संचार करते हैं। जो भक्त इन्हें नियमित रूप से गाता और सुनता है, उसका मन भगवान के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाता है। इसी समर्पण से जीवन में सच्ची शांति और आनंद का अनुभव होता है।

Maharaj Ji हमेशा यही कहते कि हैं, श्री राधा जी के 28 नामों का जाप केवल मोक्ष पाने का साधन नहीं, बल्कि यह जीवन की सभी बाधाओं और दुःखों को दूर करने वाला उपाय भी है। उन्होंने यह भी बताया कि नियमित भक्ति और गुरु का आशीर्वाद मिलकर व्यक्ति के जीवन को सम्पूर्ण बनाते हैं।

पूज्य Maharaj Ji के अनुसार, गुरु के बिना जीवन अधूरा है। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो व्यक्ति को सच्चे भक्ति मार्ग पर ले जाते हैं, जिससे भक्त श्री राधा जी की भक्ति में पूर्ण रूप से लीन हो जाता है। उन्होंने अपने उपदेशों में बार-बार सिखाया कि गुरु और राधा-भक्ति का संयोजन जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और सफलता दोनों प्रदान करता है।

🙏 राधा वल्लभ श्री हरिवंश 🙏

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